expr:class='data:blog.pageType' id='mainContent'>

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

आस्था या अनदेखी? मर्चूला में श्मशान घाट पर रचाई गई शादी, स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश ।

 


All India tv news। "देवभूमि उत्तराखंड से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। अल्मोड़ा जिले के सल्ट में स्थित खूबसूरत पर्यटन स्थल मर्चूला में, बाहरी पर्यटकों के एक दल ने प्रकृति की सुंदरता के मोह में आकर मर्यादाओं की सीमा लांघ दी। जिस स्थान को स्थानीय निवासी सदियों से 'मुक्ति धाम' यानी श्मशान घाट के रूप में उपयोग करते आए हैं, वहां ढोल-नगाड़ों के साथ जयमाला और शादी की रस्में पूरी की गईं। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला।"

मर्चूला अपनी हसीन वादियों और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल ही में यहाँ जो हुआ उसने परंपराओं और धार्मिक भावनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, बाहर से आए पर्यटकों का एक ग्रुप यहाँ एक विवाह समारोह के लिए पहुँचा था।

शानदार 'वेडिंग लोकेशन' और प्राकृतिक बैकग्राउंड की तलाश में इन लोगों ने रिजॉर्ट के पास ही नदी किनारे एक समतल जगह चुनी। लेकिन इस दल ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि वह जमीन स्थानीय ग्रामीणों के लिए पवित्र और शोक की जगह है। जिस स्थान पर वर्षों से अंतिम संस्कार की प्रक्रियाएं होती आई हैं, वहीं पर फूलों का मंडप सजाया गया और जयमाला की रस्म निभाई गई।

स्थानीय विरोध:-

जैसे ही इस बात की खबर स्थानीय लोगों को लगी, उनमें गहरा रोष फैल गया। ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट एक संवेदनशील और पूजनीय स्थान होता है, उसे 'पिकनिक स्पॉट' या 'वेडिंग डेस्टिनेशन' बनाना पहाड़ की संस्कृति और आस्था का अपमान है।

अहम सवाल:-

इस घटना ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:

क्या डेस्टिनेशन वेडिंग के नाम पर स्थानीय परंपराओं की बलि चढ़ाना जायज है?

क्या रिजॉर्ट संचालकों ने पर्यटकों को इस स्थान की जानकारी नहीं दी थी?

क्या प्रशासन को धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाने की जरूरत है?

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग मांग कर रहे हैं कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगे ताकि देवभूमि की मर्यादा बनी रहे।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.