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राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

उत्तराखंड के जंगलों में ‘तांडव’: धधक रहे हैं पहाड़, 130 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र खाक।

  


All India tv news। देहरादून:
देवभूमि उत्तराखंड के पहाड़ों से इन दिनों ठंडी हवाओं के बजाय आग की लपटें और धुएं का गुबार उठ रहा है। भीषण गर्मी और सूखे के बीच उत्तराखंड के जंगल "बारूद के ढेर" में तब्दील हो गए हैं। फरवरी से अब तक राज्य के विभिन्न हिस्सों से वनाग्नि की डराने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं।

 संकट के घेरे में देवभूमि :-
  • भीषण नुकसान: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच 200 से अधिक वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।
  • प्रभावित क्षेत्र: अब तक 130 हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि इस भीषण आग की भेंट चढ़ चुकी है, जिससे वन्यजीवों और वनस्पतियों को भारी नुकसान पहुँचा है।
  • मुख्य कारण:-
    • आसमान से बरसती भीषण गर्मी
    • सर्दियों और वसंत ऋतु में औसत से कम वर्षा
    • जंगलों में बिछी सूखी चीड़ की पत्तियां (पिरुल), जो ईंधन का काम कर रही हैं।

हालात और चुनौतियां :-
उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल, दोनों मंडलों में आग का प्रकोप जारी है। सूखी घास और तेज हवाओं के कारण आग एक पहाड़ी से दूसरी पहाड़ी तक मिनटों में फैल रही है। धुआं इतना घना है कि आस-पास के गांवों में लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है और दृश्यता  भी कम हो गई है।
प्रशासन की तैयारी :-
वन विभाग की टीमें और फायर वाचर्स दिन-रात आग बुझाने के काम में जुटे हैं। संवेदनशील इलाकों में ग्रामीणों की मदद ली जा रही है और पिरुल के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। हालांकि, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आग पर काबू पाना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

सावधान रहें:-
"ऑल इंडिया टीवी न्यूज " सभी नागरिकों से अपील करता है कि जंगलों के पास जलती हुई बीड़ी-सिगरेट न फेंकें और न ही कूड़े में आग लगाएं। आपकी एक छोटी सी लापरवाही पहाड़ के फेफड़ों को राख कर सकती है।

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