All India tv news। देहरादून से इस वक्त की बड़ी खबर आ रही है जहाँ श्रमिकों के न्यूनतम वेतन को लेकर संघर्ष तेज हो गया है। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) ने राज्य सरकार द्वारा हाल ही में की गई वेतन वृद्धि को 'श्रमिकों के साथ छलावा' करार देते हुए इसे खारिज कर दिया है। संगठन ने अब मांग की है कि महंगाई के इस दौर में श्रमिकों का न्यूनतम वेतन कम से कम 26,000 रुपये मासिक तय किया जाए।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून के प्रेस क्लब में आयोजित एक कन्वेंशन में सीटू के राष्ट्रीय और प्रांतीय नेताओं ने सरकार की नीतियों के खिलाफ हुंकार भरी है।
- मांग का आधार:- सीटू के प्रदेश अध्यक्ष एम.पी. जखमोला के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी वर्तमान दरें (अकुशल: ₹13,800, अर्ध-कुशल: ₹15,000, और कुशल: ₹16,900) वैज्ञानिक आधार पर आधारित नहीं हैं।
- सरकार का पक्ष:- धामी सरकार ने इसे एक ऐतिहासिक फैसला बताया है, क्योंकि इंजीनियरिंग इकाइयों में वेतन पुनरीक्षण लगभग 20 साल बाद किया गया है।
- राष्ट्रव्यापी आक्रोश:- कन्वेंशन में वक्ताओं ने केंद्र सरकार की 'मजदूर विरोधी' चार श्रम संहिताओं का भी विरोध किया और केरल की तर्ज पर बेहतर वेतन ढांचे की मांग की।
श्रमिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन को और उग्र करेंगे। आने वाले दिनों में सचिवालय कूच जैसे बड़े प्रदर्शनों की भी तैयारी है।

