All India tv news। पहाड़ों की ढलानों और संसाधनों की कमी के बीच अक्सर प्रतिभाएं दम तोड़ देती हैं, लेकिन अगर हौसला 'हिमालय' जैसा ऊंचा हो, तो राह खुद-ब-खुद बन जाती है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के एक ऐसे 'डिजिटल गुरुजी' के बारे में, जिन्होंने अपनी मेहनत और नवाचार से शिक्षा की परिभाषा बदल दी है। ताड़ीखेत ब्लॉक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय मटीलाधूरा में तैनात शिक्षक भास्कर जोशी ने वो कर दिखाया, जो बड़े-बड़े संस्थान नहीं कर पाए।
जब पूरा देश कोरोना काल की बंदिशों में कैद था और इंटरनेट की कमी के कारण पहाड़ के बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई थी, तब भास्कर जोशी ने हार नहीं मानी। उन्होंने तकनीक को हथियार बनाया और तैयार किया “बजेला एजुकेशन ऐप”। इस ऐप की सबसे खास बात यह है कि यह बिना इंटरनेट के भी काम करता है, जिससे दूर-दराज के उन गांवों के बच्चों को भी शिक्षा मिली जहाँ नेटवर्क का नामोनिशान नहीं था।
भास्कर जोशी यहीं नहीं रुके। उन्होंने शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का भी सहारा लिया। आज मटीलाधूरा के बच्चे एआई के माध्यम से कठिन विषयों को खेल-खेल में और रोचक तरीके से सीख रहे हैं। संसाधनों की कमी का रोना रोने वालों के लिए भास्कर जोशी एक मिसाल बन चुके हैं। उनकी इस सोच ने न केवल मटीलाधूरा बल्कि आस-पास के हजारों बच्चों के भविष्य में नई रोशनी भर दी है।
आज भास्कर जोशी के इस नवाचार की गूँज पूरे उत्तराखंड में है। तकनीक और समर्पण के इस संगम ने साबित कर दिया है कि एक शिक्षक चाहे तो गाँव की तस्वीर और बच्चों की तकदीर दोनों बदल सकता है। ऐसे शिक्षक ही असल मायने में उत्तराखंड के गौरव हैं।

