देहरादून: उत्तराखंड में पिछले कई दिनों से चल रहा नर्सिंग बेरोजगारों का महाआंदोलन 59 घंटे के कड़े संघर्ष और हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद आखिरकार समाप्त हो गया है। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के बाहर डटे नर्सिंग युवाओं के सब्र का बांध बुधवार को उस समय टूट गया जब उग्र आंदोलनकारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए आत्मदाह का प्रयास किया। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए धामी सरकार तुरंत हरकत में आई और देर रात शासन की ओर से लिखित प्रस्ताव भेजा गया, जिसके बाद बेरोजगारों ने अपने आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का बड़ा फैसला लिया।
आंदोलन की बड़ी बातें और मुख्य घटनाक्रम :-
- 59 घंटे का अनवरत धरना: नर्सिंग भर्ती की मांग को लेकर युवा दिन-रात निदेशालय परिसर में डटे रहे।
- आत्मदाह की कोशिश: सरकार के अड़ियल रुख से नाराज होकर कुछ युवाओं ने पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया।
- मौके पर भारी पुलिस बल: अप्रिय घटना को रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल और फायर ब्रिगेड तैनात रही।
- स्वास्थ्य महानिदेशक से वार्ता: स्थिति बिगड़ते देख विभाग के आला अधिकारियों ने देर रात युवाओं से वार्ता की।
- लिखित प्रस्ताव पर सहमति: शासन द्वारा मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही धरना खत्म हुआ।
युवाओं के संघर्ष और मांगों की हकीकत:-
यह आंदोलन महज एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि राज्य के हजारों नर्सिंग पास युवाओं के भविष्य और रोजगार की लड़ाई है।
- वर्षवार भर्ती की मांग: नर्सिंग बेरोजगार लंबे समय से उत्तराखंड में वर्षवार (Seniority-based) आधार पर 2,600 से अधिक पदों पर नर्सिंग अधिकारी भर्ती प्रक्रिया को पूरी करने की मांग कर रहे हैं।
- भविष्य की चिंता: कई वर्षों से लटकी इस भर्ती के कारण सैकड़ों युवाओं की सरकारी नौकरी की उम्र सीमा समाप्त होने की कगार पर है।
- उम्मीदों का संघर्ष: पहाड़ों से आकर देहरादून की सड़कों पर सो रहे इन युवाओं का कहना है कि वे सरकार के केवल मौखिक आश्वासनों से थक चुके थे, इसलिए उन्हें यह उग्र कदम उठाना पड़ा।
आगे का रास्ता: क्या युवाओं को मिलेगा हक?
सरकार द्वारा दिए गए लिखित प्रस्ताव में भर्ती प्रक्रिया को तय समय सीमा के भीतर गति देने की बात कही गई है। नर्सिंग बेरोजगार संगठन के पदाधिकारियों का साफ कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि इसे केवल स्थगित किया गया है। यदि सरकार ने तय समय के भीतर अपने वादे और लिखित प्रस्ताव पर अमल नहीं किया, तो प्रदेश भर के नर्सिंग युवा एक बार फिर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।

