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राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

विकासनगर में ममता की मार्मिक पुकार: बच्चों को नहर में लेकर कूदी माँ, बच्चे सुरक्षित पर माँ अब भी लापता।

 



 All India tv news। विकासनगर: उत्तराखंड के विकासनगर में एक बेहद दुखद और रूह कपा देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक माँ ने अपने दो मासूम बच्चों के साथ शक्ति नहर में छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों की बहादुरी और सूझबूझ से बच्चों को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, लेकिन बदकिस्मत माँ का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

घटना का विवरण
  • स्थान: विकासनगर क्षेत्र के पास स्थित शक्ति नहर।
  • परिस्थिति: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला अचानक अपने बच्चों को लेकर नहर के किनारे पहुँची और छलांग लगा दी।
  • बचाव कार्य: आस-पास मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाई और बच्चों को डूबने से पहले बचा लिया।
  • वर्तमान स्थिति: पुलिस और गोताखोरों की टीम लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है, लेकिन माँ अभी भी लापता है।

क्यों उठता है ऐसा कदम?
यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सवाल छोड़ गई है। एक माँ, जो बच्चों की ढाल होती है, आखिर किन मजबूरियों के चलते मौत को गले लगाने को मजबूर हो गई?
  • गहरा मानसिक दबाव: कभी-कभी सामाजिक या पारिवारिक तनाव व्यक्ति को इस कदर तोड़ देता है कि उसे अंत के अलावा कोई रास्ता नहीं दिखता।
  • अकेलापन और चुप्पी: समाज को यह समझने की जरूरत है कि किसी की चुप्पी के पीछे गहरा दर्द छिपा हो सकता है।

प्रशासन और समाज से अपील :-
  • प्रशासन: माँ की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन में और तेजी लाई जाए।
  • सहायता: पीड़ित परिवार और सदमे में आए बच्चों को तुरंत मनोवैज्ञानिक और आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
  • जागरूकता: अपने आस-पास के लोगों से बात करें। यदि कोई परेशान दिखे, तो उसका संबल बनें।                           हम प्रार्थना करते हैं कि माँ सकुशल मिलें और उन मासूम बच्चों को इस गहरे सदमे से उबरने की शक्ति मिले। यह समय आरोप लगाने का नहीं, बल्कि उस दर्द को समझने का है जिसने एक माँ को इतना असहाय बना दिया।

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