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राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

ममता की महान मिसाल: प्रयागराज में भीषण आग के बीच 'सुपरमॉम' ने मौत से लड़कर बचाई बच्चों की जान, खुद कुर्बान हो गई मां।

 


All India tv news।
 उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हैं और दिल में उस बहादुर मां के लिए सम्मान है। नैनी बाजार इलाके की 'चैंपियन गली' में स्थित एक तीन मंजिला मकान में भीषण आग लग गई। इस हादसे में एक मां ने अपनी जान की परवाह न करते हुए अपने तीन बच्चों और एक भतीजे को सुरक्षित मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया, लेकिन खुद को नहीं बचा सकीं।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नैनी बाजार में एक क्रॉकरी और प्लास्टिक के गोदाम वाले मकान में रात करीब 9 बजे शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लग गई। प्लास्टिक का सामान होने के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे घर को काले धुएं और लपटों ने घेर लिया। घर के पुरुष सदस्य नीचे दुकान पर थे, जबकि महिलाएं और बच्चे ऊपरी मंजिलों पर फंस गए।
मां अर्चना का अदम्य साहस :-
35 वर्षीय अर्चना केसरवानी अपने बच्चों के साथ तीसरी मंजिल पर फंस गई थीं। सीढ़ियों से नीचे उतरने का रास्ता आग और धुएं के कारण पूरी तरह बंद हो चुका था। ऐसे में अर्चना ने हार नहीं मानी और करीब 30 मिनट तक मौत से जद्दोजहद करती रहीं।
  • 1 साल के मासूम को चादर में लपेटा: अर्चना ने सबसे पहले अपने 1 साल के बेटे राघव को एक चादर में लपेटा और उसे करीब 12 फीट दूर पड़ोसी की छत की ओर उछाल दिया, जिसे वहां मौजूद लोगों ने सुरक्षित पकड़ लिया।
  • बेटियों और भतीजे को सीढ़ी से निकाला: इसके बाद अर्चना ने छत पर रखी एक लोहे की भारी सीढ़ी को पड़ोसी की छत तक लगाया। उन्होंने अपनी दो बेटियों (13 वर्षीय प्रियांशी और 10 वर्षीय शिवान्या) और 7 साल के भतीजे लव को सुरक्षित दूसरी ओर भेजा
ममता जीत गई, मां हार गई :-
अपने कलेजे के टुकड़ों को सुरक्षित करने के बाद जब अर्चना की खुद बाहर निकलने की बारी आई, तब तक वह जहरीले धुएं और आग की लपटों से बुरी तरह घिर चुकी थीं। दम घुटने और बुरी तरह झुलस जाने के कारण वह अचेत होकर गिर पड़ीं। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

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