All India tv news। देहरादून के पैनेसिया अस्पताल में लगी आग ने न केवल एक मासूम जिंदगी छीन ली, बल्कि शहर की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मृतका के बेटे के बिलखते सवाल और अस्पताल प्रबंधन की कथित लापरवाही ने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
मुख्य आरोप: बेटे ने बयां की उस काली रात की हकीकत :-
- फेल रहा सिस्टम: परिजनों का सीधा आरोप है कि ICU में आग लगने के वक्त फायर सेफ्टी सिस्टम ने काम नहीं किया।
- स्टाफ नदारद: आरोप है कि जब आग लगी, तब मरीजों को बचाने के लिए कोई प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद नहीं था।
- कमीशन का खेल? परिजनों का दावा है कि 108 एंबुलेंस कर्मियों ने सरकारी अस्पताल में बेड न होने का बहाना बनाकर निजी अस्पताल (पैनेसिया) जाने का दबाव बनाया।
- पैसों की भूख: आरोप है कि भर्ती करने के कुछ ही घंटों के भीतर अस्पताल ने 50,000 रुपये वसूल लिए, लेकिन सुरक्षा के नाम पर शून्य मिला।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल :-
- क्या देहरादून के निजी अस्पतालों में फायर सेफ्टी ऑडिट केवल कागजों तक सीमित है?
- सरकारी अस्पतालों में बेड की कमी और एंबुलेंस नेटवर्क की निजी अस्पतालों से 'सांठगांठ' की सच्चाई क्या है?
- क्या उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग इन निजी अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई करने का साहस जुटा पाएगा?

