All India tv news। कानपुर: क्या उत्तर प्रदेश पुलिस का मानवीय चेहरा पूरी तरह खो चुका है? कानपुर से आई एक भयावह तस्वीर ने पूरे महकमे और समाज को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जहाँ एक तरफ भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच जवान अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अपनों की ही बेरुखी जानलेवा साबित हो रही है।
तड़पते साथी पर नहीं पसीजा दिल :-
मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, चिलचिलाती धूप में तैनात एक हेड कॉन्स्टेबल की तबीयत अचानक बिगड़ गई। चक्कर आने के कारण वे जमीन पर गिर पड़े और छटपटाने लगे। पास ही मौजूद सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) के पास मौका था कि वे तुरंत उन्हें अस्पताल पहुँचाते, लेकिन उन्होंने हाथ बढ़ाने के बजाय मोबाइल कैमरा खोल लिया।
- संवेदनहीनता की हद: दारोगा अस्पताल ले जाने के बजाय वीडियो बनाने में व्यस्त रहे।
- अंतिम सांस: जब तक जवान को अस्पताल ले जाया गया, काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
- सवाल: क्या वर्दी के नीचे का इंसान मर चुका है?
सोशल मीडिया पर आक्रोश :-
इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद जनता में भारी गुस्सा है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या अनुशासन की आड़ में पुलिसकर्मियों के भीतर की संवेदना खत्म हो गई है?
विभाग की कार्रवाई?
वीडियो सामने आने के बाद उच्चाधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है। जांच के आदेश दिए गए हैं, लेकिन सवाल वही है—क्या खोई हुई जान इन कागजी कार्रवाइयों से वापस आएगी? यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आधुनिकता और तकनीक के इस दौर में हम "इंसान" के तौर पर कितने पीछे छूट गए हैं।

