रामनगर/मोहान:
All India tv news। उत्तराखंड के रामनगर के पास मोहान में स्थित देश की प्रतिष्ठित सरकारी दवा फैक्ट्री 'इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड' (आईएमपीसीएल) अब पूरी तरह से निजी हाथों में चली गई है। वित्त मंत्रालय की ओर से रणनीतिक बिक्री को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद, इस फैक्ट्री को 121 करोड़ रुपये से अधिक (1,210,094,400 रुपये) की सबसे ऊंची बोली लगाने वाली निजी कंपनी 'स्काईमैप फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड' को बेच दिया गया है। वर्ष 2017 से चल रही इस विनिवेश प्रक्रिया के पूरा होने के बाद से स्थानीय क्षेत्र और कर्मचारियों में भारी चिंता और नाराजगी का माहौल है।
रोजगार पर संकट: सैकड़ों परिवारों की आजीविका दांव पर:-
आईएमपीसीएल आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं के निर्माण में देश की अग्रणी और मुनाफे वाली सरकारी फैक्ट्रियों में शुमार रही है। इस फैक्ट्री से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। रामनगर, मोहान, कुमेरिया और सल्ट सहित आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों के परिवार पिछले कई दशकों से इस फैक्ट्री के भरोसे अपनी आजीविका चला रहे हैं।
निजीकरण के बाद अब सबसे बड़ा संकट यहाँ कार्यरत कर्मचारियों, विशेषकर अस्थायी और दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों पर मंडरा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि निजी प्रबंधन अपनी व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार कभी भी छंटनी कर सकता है, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने रोटी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
महीनों चला आंदोलन, संसद में भी गूंजी थी आवाज :-
इस फैक्ट्री को निजी हाथों में सौंपने के फैसले का स्थानीय स्तर पर लंबे समय से कड़ा विरोध हो रहा था। कर्मचारियों ने इसके विरोध में महीनों तक धरना-प्रदर्शन, गेट जाम और नारेबाजी कर सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की थी। यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर भी गर्माया था, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद में आईएमपीसीएल के निजीकरण का मामला उठाते हुए कर्मचारियों के भविष्य और सरकारी संपत्तियों की बिक्री पर सरकार से तीखे सवाल पूछे थे। इसके बावजूद, सरकार ने रणनीतिक विनिवेश नीति के तहत इस बिक्री को अंतिम मंजूरी दे दी।
क्षेत्र में पसरा सन्नाटा और अनिश्चितता का माहौल :-
इस अंतिम फैसले के बाद मोहान और आसपास के क्षेत्रों में सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय यूनियनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक मुनाफे वाली और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने वाली सरकारी धरोहर को निजी हाथों में बेचना क्षेत्र के विकास और जनहित के खिलाफ है। आने वाले दिनों में कर्मचारी संगठन इस निर्णय के खिलाफ अपनी अगली रणनीति तैयार कर रहे हैं।

