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मानिला कमराड पेयजल योजना में छोटे टैंक के कारण जलापूर्ति ठप; भिकियासैंण तहसील पर ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन।


 All India tv news। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण से इस वक्त की एक बड़ी खबर आ रही है, जहाँ मानिला कमराड पेयजल योजना से जुड़े ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। योजना में पानी का टैंक छोटा होने के कारण क्षेत्र में जलापूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है। पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे ग्रामीणों ने आज भिकियासैंण तहसील मुख्यालय पर इकट्ठा होकर जबरन विरोध प्रदर्शन किया और शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि जल संस्थान और संबंधित विभाग की लापरवाही का खामियाजा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है। प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भी सौंपा है। आइए देखते हैं ग्राउंड जीरो से हमारे संवाददाता की यह विशेष रिपोर्ट। 

यह आक्रोश, यह नारेबाजी और प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटते ये लोग किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता नहीं, बल्कि भिकियासैंण तहसील क्षेत्र के आम नागरिक हैं, जो बुनियादी जरूरत यानी पानी के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। मामला मानिला कमराड पेयजल योजना से जुड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने योजना तो बना दी, लेकिन दूरदर्शिता की कमी के कारण यहाँ जो पानी का टैंक बनाया गया है, वह बेहद छोटा है। आबादी के हिसाब से टैंक की क्षमता कम होने के कारण पानी हर घर तक सुचारू रूप से नहीं पहुंच पा रहा है।
गर्मियों के मौसम के बाद भी इस पहाड़ी इलाके में पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जल संस्थान को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन विभाग की ओर से सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले। थक-हारकर आज बड़ी संख्या में प्रभावित ग्रामीणों ने भिकियासैंण तहसील परिसर का रुख किया। यहाँ उन्होंने जल संस्थान और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। 
ग्रामीण का बयान :-
"हमारे क्षेत्र की मानिला कमराड योजना पूरी तरह से फेल साबित हो रही है। अधिकारियों ने इतना छोटा टैंक बनाया है कि उसमें पूरे गांवों के लिए पानी स्टोर ही नहीं हो पाता। महीनों से हम पानी की किल्लत झेल रहे हैं। आज हमने तहसील पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा है। अगर 10 दिनों के भीतर बड़े टैंक का निर्माण और सुचारू सप्लाई शुरू नहीं हुई, तो हम चक्का जाम और उग्र आंदोलन के लिए मजबूर ह

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