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सल्ट में प्राथमिकताओं और संकल्पों के साथ

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मिशन 2027

कॉर्बेट के ढेला में भारी बवाल! फॉरेस्ट गार्ड पर मारपीट का आरोप, पेट्रोल लेकर वन चौकी पर चढ़ा युवक; जांच शुरू ।


All India tv news।  उत्तराखंड के प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के ढेला रेंज से इस वक्त एक बेहद सनसनीखेज और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। कॉर्बेट की ढेला वन चौकी पर उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब वन कर्मियों की कथित ज्यादती से परेशान होकर एक स्थानीय युवक हाथ में पेट्रोल की बोतल लेकर सीधे वन चौकी की छत पर चढ़ गया।


युवक खुद को आग लगाने की धमकी दे रहा था, जिसे देखकर मौके पर मौजूद लोगों के हाथ-पांव फूल गए। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के फॉरेस्ट गार्ड ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ बर्बरता से मारपीट की है। आइए आपको दिखाते हैं कि इस पूरे हंगामे के पीछे की असल वजह क्या है और ग्राउंड जीरो पर इस वक्त क्या स्थिति है।
कॉर्बेट नेशनल पार्क की सुरक्षा के दावे करने वाला वन महकमा आज खुद सवालों के घेरे में है। मामला रामनगर के ढेला रेंज का है, जहां ढेला गांव के रहने वाले शिव गिरी और वन गुर्जर नन्नू जंगल के किनारे भट्टी के लिए सूखी (जलौनी) लकड़ी लेने गए थे। इसी दौरान वहां तैनात फॉरेस्ट गार्ड अविनाश कुमार ने उन्हें पकड़ लिया और रेंज कार्यालय ले आए।
 

ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि वन चौकी पर पहले तो उनसे वन अधिनियम के तहत जबरन चालान काटकर जुर्माना वसूला गया, और उसके बाद फॉरेस्ट गार्ड ने दोनों ग्रामीणों के साथ बेरहमी से मारपीट की। इतना ही नहीं, जब मामले ने तूल पकड़ा तो वहां मौजूद एक महिला वनकर्मी पर भी ग्रामीणों के साथ अभद्रता, गाली-गलौज और हाथापाई करने के आरोप लगे हैं।

वन कर्मियों की इस कथित गुंडागर्दी और मारपीट से आक्रोशित होकर एक युवक इंसाफ की मांग को लेकर पेट्रोल लेकर वन चौकी पर चढ़ गया, जिससे वहां हड़कंप मच गया। आनन-फानन में स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत और समझाए जाने के बाद युवक को नीचे उतारा गया। पीड़ित ग्रामीणों ने तुरंत रामनगर कोतवाली पहुंचकर आरोपी फॉरेस्ट गार्ड और दोषी वनकर्मियों के खिलाफ लिखित तहरीर सौंप दी गई है। 

इस पूरी घटना के बाद से ढेला और आसपास के ग्रामीण इलाकों में वन विभाग के खिलाफ भारी गुस्सा है। हालांकि, इस पूरे मामले पर वन विभाग के आला अधिकारियों की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या सूखी लकड़ी बीनने गए ग्रामीणों के साथ इस तरह की मारपीट कानूनन सही है? 

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