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उत्तराखंड: वन्यजीव आतंक के खिलाफ सल्ट में हुंकार, ग्रामीणों ने सरकार के सामने रखीं 10 सूत्रीय माँगें।

 


All India tv news। सल्ट (अल्मोड़ा):
 उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष और इसके कारण हो रहे पलायन की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर सल्ट विधानसभा क्षेत्र के मानिला में एक विशाल जनगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस बैठक में ग्रामीणों ने सरकार के सामने वन्यजीवों के आतंक से निपटने के लिए ठोस और स्थायी समाधान की पुरजोर मांग उठाई है।
रविवार को हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें मानव जीवन की सुरक्षा को सर्वोपरि रखने की बात कही गई है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बढ़ रहे जान-माल के खतरे के कारण लोग अपने पुश्तैनी गाँवों को छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
ग्रामीणों की 10 प्रमुख माँगें:
जनगोष्ठी में सर्वसम्मति से पारित मांग पत्र में सरकार के सामने निम्नलिखित 10 मुख्य बिंदु रखे गए हैं:
  1. मानव जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता: वन्यजीव कानूनों से ऊपर इंसानी जिंदगी की सुरक्षा को रखा जाए।
  2. हिंसक वन्यजीवों पर नियंत्रण: आबादी क्षेत्र में सक्रिय हिंसक वन्यजीवों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।
  3. मुआवजा और रोजगार: प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा दिया जाए।
  4. बंदर और नीलगाय पर नियंत्रण: खेती को बर्बाद कर रहे बंदरों और नीलगायों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी या अन्य वैज्ञानिक उपाय किए जाएं।
  5. मवेशियों का मुआवजा: वन्यजीवों के हमले में मारे गए पालतू मवेशियों के मुआवजे की राशि को बढ़ाया जाए।
  6. फसल और चारा नुकसान की भरपाई: वन्यजीवों द्वारा फसलों और चारे के नुकसान का उचित आकलन कर किसानों को वित्तीय सहायता दी जाए।
  7. मकान क्षति का मुआवजा: वन्यजीवों के हमले या इस संघर्ष के दौरान मकानों को हुई क्षति का उचित मुआवजा मिले।
  8. आत्मरक्षा में कानूनी सुरक्षा: यदि कोई ग्रामीण आत्मरक्षा में वन्यजीव पर जवाबी कार्रवाई करता है, तो उसे कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाए।
  9. वन अधिकारियों की जवाबदेही: वन्यजीवों के हमले की घटनाओं के लिए वन विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
  10. मुकदमों की वापसी: वन्यजीव आतंक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले आंदोलनकारियों पर दर्ज किए गए सभी मुकदमों को तुरंत वापस लिया जाए।
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों की रही मौजूदगी :-
इस जनगोष्ठी में क्षेत्र के सम्मानित नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में मुख्य रूप से नारायण सिंह रावत, मुनीष कुमार, राजेन्द्र नेगी, चन्द्र सिंह रावत, घनानन्द शर्मा, पी. सी. तिवारी, चारु तिवारी, नंदन सिंह मनराल, मनीष सुंदरियाल, प्रभात ध्यानी, सुरेश टम्टा, नंदन रावत, ललिता रावत, अजय कुमार, सरस्वती रावत, पंकज, विजय, अनिता कनवाल, भावनी राम, प्रताप आर्या, गिरीश आर्य और पूरन भाकुनी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इन मांगों पर जल्द ही कोई ठोस और स्थायी कदम नहीं उठाया, तो पूरे क्षेत्र में एक बड़ा जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

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