All India tv news। पूर्वी चंपारण जिले के चकिया-केसरिया मार्ग पर निर्माणाधीन 'विराट रामायण मंदिर' अपनी भव्यता के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहा है। करीब 120 एकड़ के विशाल परिसर में बन रहे इस मंदिर में दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना की जाएगी, जिसे 'विराट शिवलिंग' नाम दिया गया है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सबसे खास बात यह है कि मंदिर निर्माण के लिए कुल भूमि में से लगभग 20 एकड़ जमीन स्थानीय मुस्लिम परिवारों ने भगवान शिव और राम के नाम पर दान की है।
सामाजिक एकता की अनूठी मिसाल :-
जमीन दान करने वाले मुस्लिम विक्रेताओं और स्थानीय लोगों ने इस पहल को हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बताया है। उनका कहना है कि इस मंदिर के बनने से न केवल धार्मिक महत्व बढ़ेगा, बल्कि क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक लाभ भी सभी समुदायों को समान रूप से मिलेंगे।
एक विक्रेता ने कहा, "हमने खुशी-खुशी जमीन दान की है। यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि हमारे क्षेत्र के विकास का जरिया बनेगा, जिससे हिंदू-मुस्लमान, सभी को फायदा होगा।"
मंदिर की मुख्य विशेषताएं :-
'विराट रामायण मंदिर' को कंबोडिया के विश्व प्रसिद्ध अंकोरवाट मंदिर की तर्ज पर बनाया जा रहा है।
विशाल शिवलिंग:- मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होने वाला शिवलिंग विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग होगा।
भव्य परिसर:- यह मंदिर 120 एकड़ में फैला होगा, जिसमें कई छोटे मंदिर और धार्मिक स्थल शामिल होंगे।
लागत:- इस परियोजना की अनुमानित लागत करोड़ों रुपये है, जिसका प्रबंधन पटना स्थित महावीर मंदिर ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है।
इस विशाल मंदिर परियोजना ने बिहार में सांप्रदायिक सद्भाव की एक नई कहानी लिखी है, जहां धर्म से ऊपर उठकर लोगों ने एकता और विकास को प्राथमिकता दी है।


