All India tv news। देहरादून: उत्तराखंड में आगामी जनगणना 2027 के लिए सरकार ने एक व्यापक मास्टरप्लान तैयार कर लिया है। इस ऐतिहासिक गणना को सटीक बनाने के लिए पूरे राज्य को 30,000 छोटे हिस्सों में विभाजित किया जाएगा।
जनगणना की मुख्य बातें:-
सूक्ष्म नियोजन:- जनगणना की सटीकता के लिए प्रदेश को 30 हजार ब्लॉकों में बांटा गया है। नियम के अनुसार, एक हिस्से में अधिकतम 800 नागरिक और 150 से 200 मकान शामिल होंगे। यदि किसी गांव या वार्ड की जनसंख्या 800 से अधिक होती है, तो उसे दो बराबर हिस्सों में बांट दिया जाएगा।
तीन चरणों में प्रक्रिया:- उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और बर्फबारी को देखते हुए गणना तीन चरणों में होगी:
प्रथम चरण (25 अप्रैल - 24 मई 2026):- अधिकांश क्षेत्रों में मकानों का सूचीकरण और आवास गणना।
द्वितीय चरण (11 - 30 सितंबर 2026):- ऊंचाई वाले 'स्नो-बाउंड' (बर्फबारी वाले) क्षेत्रों में गणना, ताकि पलायन से पहले सटीक डेटा मिल सके।
तृतीय चरण (9 - 28 फरवरी 2027):- शेष क्षेत्रों में देशभर के साथ मुख्य जनगणना।
डिजिटल जनगणना और स्व-गणना:- भारत की यह पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा। नागरिक 9 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच एक विशेष पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
विशाल जनशक्ति और प्रशिक्षण:- इस महाअभियान के लिए 30,000 गणना अधिकारी और 4,000 सुपरवाइजर तैनात किए जा रहे हैं। चार्ज अधिकारियों का प्रशिक्षण 16 फरवरी से शुरू हो चुका है, जबकि फील्ड स्तर के कर्मियों की ट्रेनिंग 25 मार्च से 7 अप्रैल के बीच पूरी की जाएगी।
प्रशासनिक सीमाएं सील:- जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, अधिसूचना जारी होने के साथ ही प्रदेश की प्रशासनिक सीमाएं सील कर दी गई हैं। अब जनगणना पूरी होने तक किसी भी जिले, तहसील या वार्ड की सीमा में बदलाव नहीं किया जाएगा।
यह जनगणना न केवल जनसंख्या के आंकड़े जुटाएगी, बल्कि पहली बार जाति आधारित गणना को भी इसमें शामिल किया गया है, जो भविष्य की विकास योजनाओं का आधार बनेगी।

