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"TET की अनिवार्यता पर आर-पार की जंग: देशभर के 25 लाख शिक्षकों ने फूंका आंदोलन का बिगुल, दिल्ली तक गूंजेगी आवाज!"

 


All India tv news। उत्तराखंड समेत देशभर के सरकारी स्कूलों में सालों से सेवा दे रहे लाखों शिक्षकों के लिए इस वक्त एक बड़ी खबर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के उस आदेश के बाद, जिसमें सेवाकालीन शिक्षकों के लिए भी TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्य कर दी गई है, अब शिक्षकों का गुस्सा सड़कों पर उतरने को तैयार है। अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने इस 'अन्यायपूर्ण' फैसले के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का पूरा खाका तैयार कर लिया है।

आंदोलन की मुख्य बातें और शेड्यूल:-

शिक्षक संघों ने चरणबद्ध तरीके से विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया है:-

22 फरवरी 2026:- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर एक बड़ा हैशटैग अभियान चलाया जाएगा। 

23 से 25 फरवरी 2026:- देशभर के शिक्षक अपने-अपने स्कूलों में काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे। 

26 फरवरी 2026:- सभी जिला मुख्यालयों पर मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालयों के बाहर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। 

मार्च का अंतिम सप्ताह:- आंदोलन का मुख्य केंद्र दिल्ली का जंतर-मंतर या रामलीला मैदान होगा, जहाँ देशभर से जुटे लाखों शिक्षक एक विशाल महारैली करेंगे। 

शिक्षकों की प्रमुख मांगें:-

2011 से पूर्व नियुक्तियों को छूट:- शिक्षकों का तर्क है कि TET 2011 से लागू हुआ था, इसलिए इससे पहले नियुक्त शिक्षकों पर इसे थोपना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। 

पदोन्नति में बाधा:- शिक्षकों का कहना है कि इस नियम की वजह से हजारों वरिष्ठ शिक्षकों की पदोन्नति रुकी हुई है। 

अनुभव बनाम परीक्षा:- संघ का कहना है कि 20-25 साल का अनुभव रखने वाले शिक्षकों को अब परीक्षा के जरिए योग्यता साबित करने के लिए मजबूर करना उनका मनोबल गिराने जैसा है। 

उत्तराखंड की स्थिति:-

उत्तराखंड में भी इस फैसले का व्यापक असर देखा जा रहा है। यहाँ के करीब 18,000 से ज्यादा शिक्षक इस फैसले से सीधे प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने का फैसला लिया है, लेकिन शिक्षक तब तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं जब तक केंद्र सरकार कानून में संशोधन कर उन्हें राहत नहीं देती। 

शिक्षा व्यवस्था पर इस आंदोलन का बड़ा असर पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या केंद्र सरकार शिक्षकों की इस 'हुंकार' के बाद नियमों में कोई ढील देती है या फिर यह संघर्ष और उग्र होगा।

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