All India tv news। नई दिल्ली में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में आज केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के भविष्य को लेकर भारत सरकार के विज़न को साझा किया। "नवोन्मेषण से प्रभाव: सार्वजनिक स्वास्थ्य में एआई का क्रांतिकारी परिवर्तन" विषय पर आयोजित एक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया।
भाषण के मुख्य बिंदु:
1. असमानता दूर करना ही AI की असली सफलता:-
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवा में AI की सफलता का आकलन केवल तकनीकी प्रगति से नहीं, बल्कि मानव जीवन पर इसके वास्तविक प्रभाव से होना चाहिए। उन्होंने कहा, "AI के मूल्यांकन का असली पैमाना यह है कि वह स्वास्थ्य सेवाओं की असमानताओं को कम करने में कितनी मदद करता है और दूर-दराज के इलाकों तक गुणवत्तापूर्ण इलाज पहुँचाने में कितना सक्षम है।"
2. डॉक्टर बनाम AI - एक सहयोगी रिश्ता:-
भविष्य की आशंकाओं को दूर करते हुए मंत्री ने कहा कि AI का उद्देश्य चिकित्सकों को प्रतिस्थापित करना नहीं, बल्कि उनकी क्षमताओं का संवर्धन करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि AI रूटीन और प्रशासनिक कार्यों को संभालकर डॉक्टरों का बोझ कम करेगा, जिससे डॉक्टर अपना पूरा ध्यान जटिल मामलों और मरीजों की गहन देखभाल पर केंद्रित कर सकेंगे।
3. सार्वजनिक स्वास्थ्य में क्रांति:-
सत्र के दौरान इस बात पर चर्चा हुई कि कैसे AI शुरुआती निदान, महामारी की भविष्यवाणी और व्यक्तिगत उपचार योजनाओं में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। अनुप्रिया पटेल ने विश्वास जताया कि भारत AI के सही उपयोग से अपनी विशाल जनसंख्या के लिए एक अधिक समावेशी और कुशल स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण कर सकता है।
समिट में विशेषज्ञों ने भी माना कि सरकार का यह रुख स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने यह साफ कर दिया है कि भारत आने वाले समय में 'AI फॉर सोशल गुड' के वैश्विक अभियान का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।

