All India tv news। आज हम बात करेंगे उस शक्ति की, जिनके नाम मात्र से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है। जिन्हें हम संकटमोचन के नाम से जानते हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है— 'को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो'। आखिर क्यों भगवान हनुमान को संकटमोचन कहा जाता है और कैसे उनकी भक्ति आज के इस तनावपूर्ण युग में संजीवनी का काम कर रही है?
संकटमोचन का अर्थ: 'संकट' यानी समस्या और 'मोचन' यानी मुक्ति दिलाने वाला। शास्त्र कहते हैं कि हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार हैं, जो विशेष रूप से अपने भक्तों को भय, दरिद्रता और रोगों से मुक्ति दिलाने के लिए पृथ्वी पर मौजूद हैं।
पौराणिक महिमा: रामायण काल से ही हनुमान जी प्रभु श्रीराम के संकटों के साथी रहे हैं। चाहे माता सीता की खोज के लिए समुद्र लांघना हो या लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए संजीवनी पर्वत लाना, उन्होंने हर बार असंभव को संभव कर दिखाया।
काशी का ऐतिहासिक संबंध: वाराणसी स्थित संकट मोचन मंदिर की स्थापना 16वीं शताब्दी में स्वयं गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी. मान्यता है कि यहाँ आज भी हनुमान जी साक्षात विराजमान होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
कैसे दूर होते हैं संकट?: ज्योतिष और धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ, हनुमान अष्टक या बजरंग बाण का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। विशेषकर मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा शनि दोष और मंगल दोष के बुरे प्रभावों को कम करने में भी सहायक मानी जाती है।
आज के समय में महत्व: वर्ष 2026 की शुरुआत से ही देश भर के हनुमान मंदिरों, जैसे अयोध्या के हनुमानगढ़ी, में विशेष पाठों का आयोजन भक्तों की भारी भीड़ को आकर्षित कर रहा है, जो यह दर्शाता है कि आधुनिक काल में भी हनुमान जी के प्रति लोगों की अटूट आस्था बनी हुई है।

