All India tv news (AI source)। बिहार की राजधानी पटना से एक ऐसी शादी की खबर सामने आई है, जिसने न केवल इंटरनेट पर सुर्खियां बटोरी हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव की एक नई इबारत भी लिख दी है। आज के दौर में जहाँ शादियों में दिखावा और आडंबर हावी है, वहीं एक उच्च शिक्षित और प्रभावशाली पद पर आसीन जोड़े ने इन सभी बेड़ियों को तोड़कर एक 'पाखंड मुक्त' विवाह रचाया है।
इस अनोखी शादी के दूल्हा हैं— अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी (SDWO), जो पेशे से एक IITian भी हैं। वहीं, दुल्हन प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी (BPRO) के रूप में कार्यरत हैं। दोनों ही अधिकारी ओबीसी यादव समाज से ताल्लुक रखते हैं। इस शादी की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें किसी पारंपरिक कर्मकांड या पंडित के मंत्रोच्चार के बजाय, भारत के संविधान की शपथ लेकर वैवाहिक जीवन की शुरुआत की गई।
संविधान की गवाही:- दूल्हा-दुल्हन ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर और भारतीय संविधान को साक्षी मानकर एक-दूसरे का साथ निभाने का संकल्प लिया।
पाखंड मुक्त विवाह:- यह विवाह बिना किसी पंडित, मंत्रोच्चार या पारंपरिक धार्मिक कर्मकांडों के संपन्न हुआ, जिसे 'अर्जक विवाह' पद्धति के रूप में भी देखा जा रहा है।
शिक्षित समाज का संदेश:- दोनों अधिकारियों का मानना है कि शिक्षा का असली उद्देश्य समाज में व्याप्त अंधविश्वासों को खत्म कर एक तार्किक और संवैधानिक समाज का निर्माण करना है।
सोशल मीडिया पर इस जोड़े को भारी जनसमर्थन और बधाइयां मिल रही हैं। लोग इसे 'अंबेडकरवाद' की ओर बढ़ता एक साहसिक कदम बता रहे हैं। यह विवाह उन युवाओं के लिए एक बड़ी सीख है जो अपनी जड़ों और संवैधानिक मूल्यों को अपनी सफलता का आधार मानते हैं। समाज में ऐसे बदलाव निश्चित रूप से एक प्रगतिशील भारत की नींव रखेंगे।

