All India tv news। "हौसले बुलंद हों तो उम्र सिर्फ एक आंकड़ा बनकर रह जाती है। पंजाब के रोपड़ के रहने वाले महज 7 वर्षीय तेघबीर सिंह ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। अपनी छोटी सी उम्र में तेघबीर ने हिमालय की उन ऊंचाइयों को छुआ है, जहाँ अच्छे-अच्छे अनुभवी ट्रेकर्स के पसीने छूट जाते हैं। आइए जानते हैं इस नन्हें चैंपियन की अविश्वसनीय कहानी।"
कहते हैं कि 'पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं', और तेघबीर सिंह ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। पंजाब के रोपड़ के इस 7 साल के बच्चे ने नेपाल के सबसे कठिन रास्तों में से एक 'अन्नपूर्णा सर्किट' को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
तेघबीर ने 5,416 मीटर की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित 'थोरोंग ला दर्रा' (Thorong La Pass) को पार किया। इसी के साथ वे इस दुर्गम ट्रैक को इतनी कम उम्र में पूरा करने वाले दुनिया के सबसे युवा ट्रेकर बन गए हैं।
चुनौतियों पर भारी पड़ा जुनून:-
अन्नपूर्णा सर्किट अपनी कम ऑक्सीजन, जमा देने वाली ठंड और कठिन चढ़ाई के लिए जाना जाता है। लेकिन तेघबीर की मानसिक दृढ़ता और कड़े अनुशासन के आगे हिमालय की चुनौतियां भी छोटी पड़ गईं।
कोई इत्तेफाक नहीं है यह जीत:-
यह तेघबीर की पहली बड़ी उपलब्धि नहीं है। इससे पहले वे यूरोप की सबसे ऊंची चोटी 'माउंट एल्ब्रस' पर भी तिरंगा लहरा चुके हैं। उनकी यह लगातार दूसरी बड़ी सफलता उनके अटूट जुनून और कड़ी मेहनत का परिणाम है।
तेघबीर की यह उपलब्धि आज देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो आसमान की ऊंचाइयों को छूना नामुमकिन नहीं है।

