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राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।

राम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा का आयोजन किया जाएगा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।

श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुंदरकांड पाठ व भंडारा।
श्री शांताकारम् हनुमत मंदिर, बसोली पट्ठर,सल्ट, उत्तराखंड। 9050463700

आस्था की आड़ में जानलेवा जोखिम: पीरियड्स रोकने की दवा बनी 18 साल की युवती की मौत का कारण।

 

 


All India tv news। एक छोटी सी लापरवाही और बिना डॉक्टरी सलाह के ली गई एक गोली कैसे जानलेवा साबित हो सकती है, इसका खौफनाक उदाहरण सामने आया है। महज़ 18 साल की एक युवती, जिसका पूरा भविष्य सामने था, अंधविश्वास और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही की भेंट चढ़ गई। पूजा-पाठ में शामिल होने के लिए पीरियड्स (मासिक धर्म) रोकने वाली दवा लेना उस लड़की के लिए मौत का फरमान साबित हुआ।

क्या है पूरी घटना?

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, युवती के घर में धार्मिक अनुष्ठान होना था। मासिक धर्म की वजह से पूजा में बाधा न आए, इसलिए युवती ने बिना किसी डॉक्टर से परामर्श किए पीरियड्स टालने वाली हार्मोनल दवा का सेवन कर लिया। दवा लेने के कुछ समय बाद ही उसे असहजता महसूस होने लगी। 

लापरवाही की इंतहा :-

 जब तबीयत बिगड़ी तो डॉक्टरों ने उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी थी। लेकिन परिजनों ने स्थिति की गंभीरता को नहीं समझा और उसे घर ले आए। रात होते-होते युवती की हालत बेहद नाजुक हो गई। शरीर में खून का थक्का जमने के कारण उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

डॉक्टरों के अनुसार, मासिक धर्म को नियंत्रित करने वाली दवाइयां सीधे शरीर के हार्मोन्स पर असर डालती हैं। बिना डॉक्टरी जांच के इन दवाओं का सेवन खून को गाढ़ा कर सकता है, जिससे नसों में थक्के जम जाते हैं। इसे मेडिकल भाषा में डीप वेन थ्रॉम्बोसिस कहा जाता है। अगर यह थक्का फेफड़ों या दिल तक पहुँच जाए, तो इंसान की मौके पर ही मौत हो सकती है।

न्यूज चैनल की अपील:-

हम अपने सभी दर्शकों से यह अपील करते हैं कि किसी भी प्रकार की हार्मोनल दवा या सप्लीमेंट लेने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें। आस्था और परंपराएं अपनी जगह हैं, लेकिन याद रखें—स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है। आपकी एक छोटी सी सावधानी आपकी जान बचा सकती है।

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