All India tv news। उत्तर प्रदेश में बाहर खाना खाने वालों और शौकीनों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। वहीं, राज्य के होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए प्रशासन ने एक बेहद सख्त फरमान जारी कर दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने मिलावटखोरी और सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर नकेल कसने के लिए नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं। अब अगर आप यूपी के किसी भी होटल या रेस्टोरेंट में खाना खाने जाते हैं, तो आपको यह पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि खाना किस तेल में बना है। रेस्टोरेंट संचालकों को अब अपने मेन्यू कार्ड पर साफ-साफ लिखना होगा कि उन्होंने खाना पकाने में किस खाद्य तेल (Cooking Oil) का इस्तेमाल किया है।
प्रशासन का यह सख्त निर्देश छोटे से लेकर बड़े, सभी खाद्य प्रतिष्ठानों पर लागू होगा। इसके पीछे का मकसद ग्राहकों को उनके भोजन की शुद्धता और गुणवत्ता के प्रति जागरूक करना है।
नए नियमों के तहत क्या-क्या बदलना अनिवार्य होगा:
- मेन्यू में तेल की जानकारी: ग्राहकों को परोसे जाने वाले भोजन में रिफाइंड, सरसों, सोयाबीन या डालडा—किस तेल का इस्तेमाल हुआ है, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।
- फूड सेफ्टी कनेक्ट QR कोड: हर रेस्टोरेंट और ढाबे के काउंटर या प्रमुख जगह पर 'फूड सेफ्टी कनेक्ट' (Food Safety Connect) का क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
- सीधी शिकायत की सुविधा: अगर किसी ग्राहक को खाने की क्वालिटी या सफाई को लेकर कोई भी शक होता है, तो वह इस QR कोड को स्कैन करके सीधे प्रशासन से शिकायत दर्ज करा सकता है।
- किचन की सफाई और रिकॉर्ड: सभी प्रतिष्ठानों को अपने किचन की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना होगा और इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों का पूरा रिकॉर्ड मेंटेन करना होगा।
यूपी सरकार और FSDA का यह कदम जनता की सेहत के लिहाज से एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि होटल और रेस्टोरेंट संचालक इस आदेश का कितनी सख्ती से पालन करते हैं।

