All India tv news । देहरादून/पौड़ी गढ़वाल:
कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो और इरादे फौलादी हों, तो पहाड़ों जैसी चुनौतियाँ भी घुटने टेक देती हैं। ऐसा ही कुछ सच कर दिखाया है उत्तराखंड के पौड़ी जिले के रिखणीखाल की रहने वाली एक साधारण परिवार की बेटी अंजलि शाह (साह) ने। अंजलि ने न केवल अपने बचपन के सपने को हकीकत में बदला है, बल्कि उत्तराखंड की पहली महिला असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) बनकर इतिहास रच दिया है।
कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो और इरादे फौलादी हों, तो पहाड़ों जैसी चुनौतियाँ भी घुटने टेक देती हैं। ऐसा ही कुछ सच कर दिखाया है उत्तराखंड के पौड़ी जिले के रिखणीखाल की रहने वाली एक साधारण परिवार की बेटी अंजलि शाह (साह) ने। अंजलि ने न केवल अपने बचपन के सपने को हकीकत में बदला है, बल्कि उत्तराखंड की पहली महिला असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) बनकर इतिहास रच दिया है।
बचपन का सपना हुआ साकार :-
अंजलि को बचपन से ही ट्रेनों के प्रति एक अलग आकर्षण था। बचपन में जब भी वह ट्रेन देखती थीं, तो उन्होंने तभी ठान लिया था कि वह एक दिन खुद इस भारी-भरकम ट्रेन को दौड़ाएंगी। पहाड़ के सीमित संसाधनों और मुश्किलों के बीच पढ़ाई करते हुए अंजलि ने रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) जम्मू के माध्यम से परीक्षा दी थी। कड़ी मेहनत और लंबे इंतजार के बाद जब उनकी वेटिंग क्लियर हुई, तो उनके सपनों को पंख मिल गए।
अंजलि को बचपन से ही ट्रेनों के प्रति एक अलग आकर्षण था। बचपन में जब भी वह ट्रेन देखती थीं, तो उन्होंने तभी ठान लिया था कि वह एक दिन खुद इस भारी-भरकम ट्रेन को दौड़ाएंगी। पहाड़ के सीमित संसाधनों और मुश्किलों के बीच पढ़ाई करते हुए अंजलि ने रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) जम्मू के माध्यम से परीक्षा दी थी। कड़ी मेहनत और लंबे इंतजार के बाद जब उनकी वेटिंग क्लियर हुई, तो उनके सपनों को पंख मिल गए।
6 महीने की कठिन ट्रेनिंग और पहली पोस्टिंग :-
अंजलि ने अपनी 6 महीने की कठिन बेसिक ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा किया। जिसके बाद साल 2019 में बतौर असिस्टेंट लोको पायलट उनकी पहली नियुक्ति हरिद्वार-ऋषिकेश रूट पर हुई। वर्तमान में वह इसी रूट पर चलने वाली हेमकुंड एक्सप्रेस और बाड़मेर एक्सप्रेस जैसी बड़ी ट्रेनों के संचालन में मुख्य लोको पायलट के साथ अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे रही हैं।
अंजलि ने अपनी 6 महीने की कठिन बेसिक ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा किया। जिसके बाद साल 2019 में बतौर असिस्टेंट लोको पायलट उनकी पहली नियुक्ति हरिद्वार-ऋषिकेश रूट पर हुई। वर्तमान में वह इसी रूट पर चलने वाली हेमकुंड एक्सप्रेस और बाड़मेर एक्सप्रेस जैसी बड़ी ट्रेनों के संचालन में मुख्य लोको पायलट के साथ अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे रही हैं।
महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल :-
आमतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों की बेटियों को पारंपरिक क्षेत्रों में ही करियर बनाते देखा जाता है, लेकिन अंजलि ने इस रूढ़िवादी सोच को पीछे छोड़ते हुए उस क्षेत्र को चुना जिसे पुरुषों का गढ़ माना जाता था। अंजलि की यह शानदार उपलब्धि आज देश और खासकर पहाड़ के उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं।
आमतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों की बेटियों को पारंपरिक क्षेत्रों में ही करियर बनाते देखा जाता है, लेकिन अंजलि ने इस रूढ़िवादी सोच को पीछे छोड़ते हुए उस क्षेत्र को चुना जिसे पुरुषों का गढ़ माना जाता था। अंजलि की यह शानदार उपलब्धि आज देश और खासकर पहाड़ के उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं।
उत्तराखंड की इस जांबाज बेटी की सफलता पर पूरे प्रदेश को गर्व है। हमारे न्यूज़ चैनल "ऑल इंडिया टीवी न्यूज" की ओर से अंजलि शाह को इस ऐतिहासिक कामयाबी के लिए हार्दिक बधाई और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं।
