All India tv news। शिक्षा सत्र के बीच में लिए गए प्रशासनिक फैसले कैसे छात्रों के भविष्य पर भारी पड़ते हैं, इसकी एक बानगी उत्तराखंड के रामनगर में देखने को मिली है। रामनगर के प्रतिष्ठित पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अचानक हुए थोक तबादलों से हड़कंप मच गया है। एक साथ 21 प्राध्यापकों के ट्रांसफर ने कॉलेज की पूरी व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस 'तबादला एक्सप्रेस' के बाद कॉलेज में कई महत्वपूर्ण विभाग पूरी तरह से खाली हो चुके हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई और आगामी परीक्षाओं पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। आइए देखते हैं इस ग्राउंड रिपोर
रामनगर का पीएनजी राजकीय महाविद्यालय, जहाँ इन दिनों पढ़ाई की गूंज से ज्यादा तबादलों की चर्चा है। कॉलेज प्रशासन और छात्र उस वक्त सन्न रह गए जब सरकार की तबादला नीति के तहत कॉलेज से एक साथ 21 सीनियर प्राध्यापकों का ट्रांसफर कर दिया गया। नियम के मुताबिक जितने शिक्षक जाते हैं, उतने ही आने चाहिए। लेकिन यहाँ गणित बिल्कुल उल्टा बैठ गया। 21 प्राध्यापकों की विदाई के बदले कॉलेज को सिर्फ 17 नए प्राध्यापक ही मिले। यानी सीधे-सीधे 4 शिक्षकों का टोटा।
इस अदला-बदली ने कॉलेज के कई विभागों को वेंटिलेटर पर ला खड़ा किया है। सबसे बदतर स्थिति संस्कृत विभाग की है, जो अब पूरी तरह से खाली हो चुका है। यहाँ से शिक्षकों का तबादला तो कर दिया गया, लेकिन उनकी जगह किसी नए शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई। सिर्फ संस्कृत ही नहीं, बल्कि समाजशास्त्र , भूगोल और वनस्पति विज्ञान जैसे मुख्य विषयों में भी शिक्षकों की भारी कमी हो गई है।
सवाल यह उठता है कि क्या शिक्षा सत्र के ठीक बीच में इस तरह का कदम उठाना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं है? इस समय कॉलेज में सेमेस्टर परीक्षाएं चल रही हैं, जो 10 जुलाई तक चलनी हैं। परीक्षाओं के इस संवेदनशील माहौल में जहां छात्रों को गाइडेंस की जरूरत है, वहां से उनके गुरुओं को ही हटा दिया गया। नए शिक्षकों को व्यवस्था समझने और छात्रों को उनके साथ तालमेल बिठाने में वक्त लगेगा, जिसका सीधा असर परीक्षा के नतीजों पर पड़ सकता है।
रामनगर डिग्री कॉलेज की यह स्थिति सीधे तौर पर नीति निर्धारकों की अदूरदर्शिता को दर्शाती है। तबादले प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन जब ये प्रक्रियाएं छात्रों के करियर और उनकी परीक्षाओं के बीच में रोड़ा बनने लगें, तो गंभीर सवाल खड़े होते हैं। अब देखना यह होगा कि क्या उच्च शिक्षा विभाग इस खालीपन को भरने के लिए तुरंत कोई वैकल्पिक कदम उठाता है, या फिर रामनगर के इन छात्रों का भविष्य ऐसे ही अधर में लटका रहेगा।

