आज हम बात कर रहे हैं जनता की गाढ़ी कमाई की उस बेरहम बर्बादी की, जिसे सुनकर आपका सिर चकरा जाएगा। मामला गुजरात के राजकोट का है। जहाँ एक तरफ राजकोट नगर निगम (RMC) का बुलडोजर गरीब जनता के आशियानों को जमींदोज़ कर रहा था, वहीं दूसरी तरफ इस अभियान में शामिल अधिकारी और कर्मचारी 'शाही दावतों' का लुत्फ उठा रहे थे।
मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार अवैध कब्जे हटाने के नाम पर चले इस सिर्फ 3 दिनों के तोड़फोड़ अभियान में अधिकारियों के चाय, नाश्ते, पानी और भोजन पर ₹46 लाख से ज्यादा का भारी-भरकम खर्च आया है! जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना— ₹46 लाख!
आइए आपको बताते हैं कि जनता के टैक्स के पैसे को ३ दिन में कैसे उड़ाया गया:
- चाय-नाश्ता और लंच (दोपहर का भोजन): लगभग ₹27.20 लाख (जिसमें ₹20 लाख सिर्फ लंच का बताया जा रहा है)।
- मिनरल वॉटर (पीने का पानी): लगभग ₹12.40 लाख।
- टेंट और वीआईपी वीआईपी व्यवस्थाएं: करीब ₹6.70 लाख।
सोचिए, जहाँ गरीब जनता अपने आशियाने उजड़ते देख खून के आंसू रो रही थी, वहाँ सरकारी अमला ₹12 लाख का तो सिर्फ पानी पी गया! सोशल मीडिया पर इस खर्च के बिल वायरल होने के बाद अब जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह कोई जनसेवा का अभियान था या फिर सरकारी खजाने को चूना लगाने का कोई बड़ा खेल?
इस मामले पर सियासी गलियारों से लेकर आम जनता के बीच भारी विवाद छिड़ गया है। बढ़ते दबाव को देखते हुए फिलहाल स्टैंडिंग कमेटी ने इस बिल के भुगतान पर रोक लगा दी है और अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। लेकिन सवाल वही है— गरीब के घर तोड़ने की इस कथित मुस्तैदी के पीछे क्या भ्रष्टाचार की एक बड़ी 'दावत' छिपी थी?

