All India tv news। पौड़ी गढ़वाल:
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। पौड़ी गढ़वाल जिले के खांड्यूसैंण इलाके के वजली गांव में गुलदार (तेंदुए) के आतंक से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। इलाके में एक 4 साल की मासूम बच्ची आरुषि को गुलदार द्वारा घर के आंगन से उठाकर मार डालने की दर्दनाक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया है।
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। पौड़ी गढ़वाल जिले के खांड्यूसैंण इलाके के वजली गांव में गुलदार (तेंदुए) के आतंक से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। इलाके में एक 4 साल की मासूम बच्ची आरुषि को गुलदार द्वारा घर के आंगन से उठाकर मार डालने की दर्दनाक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया है।
विधायक का घेराव और गाड़ी के बोनट पर चढ़ी बुजुर्ग महिला :-
मासूम की मौत की खबर मिलते ही जब स्थानीय भाजपा विधायक राजकुमार पोरी गांव में पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे, तो आक्रोशित ग्रामीणों ने उनका जोरदार घेराव कर दिया। गुस्सा इस कदर था कि महिलाओं और ग्रामीणों ने विधायक की गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया और उन्हें करीब डेढ़ घंटे तक बंधक बनाए रखा। इस दौरान एक बुजुर्ग महिला (दादी) सिस्टम की नाकामी के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करते हुए सीधे विधायक की गाड़ी के बोनट पर चढ़ गईं।
मासूम की मौत की खबर मिलते ही जब स्थानीय भाजपा विधायक राजकुमार पोरी गांव में पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे, तो आक्रोशित ग्रामीणों ने उनका जोरदार घेराव कर दिया। गुस्सा इस कदर था कि महिलाओं और ग्रामीणों ने विधायक की गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया और उन्हें करीब डेढ़ घंटे तक बंधक बनाए रखा। इस दौरान एक बुजुर्ग महिला (दादी) सिस्टम की नाकामी के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करते हुए सीधे विधायक की गाड़ी के बोनट पर चढ़ गईं।
अधिकारियों ने नहीं उठाया फोन, पुलिस ने बमुश्किल निकाला बाहर :-
प्रदर्शन के दौरान माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। ग्रामीणों के बीच फंसे विधायक राजकुमार पोरी ने मौके से ही जिलाधिकारी (DM) को तीन बार और वन मंत्री को एक बार फोन मिलाया, लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या मंत्री ने उनका फोन नहीं उठाया। फोन न उठने से ग्रामीणों का गुस्सा और ज्यादा भड़क गया और भीड़ ने विधायक की गाड़ी में तोड़फोड़ भी शुरू कर दी। बाद में मौके पर मुस्तैद पुलिस बल ने किसी तरह भारी मशक्कत के बाद विधायक को सुरक्षित भीड़ के बीच से बाहर निकाला।
प्रदर्शन के दौरान माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। ग्रामीणों के बीच फंसे विधायक राजकुमार पोरी ने मौके से ही जिलाधिकारी (DM) को तीन बार और वन मंत्री को एक बार फोन मिलाया, लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या मंत्री ने उनका फोन नहीं उठाया। फोन न उठने से ग्रामीणों का गुस्सा और ज्यादा भड़क गया और भीड़ ने विधायक की गाड़ी में तोड़फोड़ भी शुरू कर दी। बाद में मौके पर मुस्तैद पुलिस बल ने किसी तरह भारी मशक्कत के बाद विधायक को सुरक्षित भीड़ के बीच से बाहर निकाला।
ग्रामीणों की मांग और सिस्टम पर सवाल :-
ग्रामीणों का आरोप है कि इस क्षेत्र में गुलदार के हमलों में अब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन वन विभाग और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। लोगों का कहना है कि अधिकारी सिर्फ घटनाओं के बाद आते हैं, जबकि ठोस सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि वन मंत्री खुद मौके पर आएं और इस आदमखोर गुलदार को तुरंत पकड़ने या मारने के आदेश दिए जाएं।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस क्षेत्र में गुलदार के हमलों में अब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन वन विभाग और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। लोगों का कहना है कि अधिकारी सिर्फ घटनाओं के बाद आते हैं, जबकि ठोस सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि वन मंत्री खुद मौके पर आएं और इस आदमखोर गुलदार को तुरंत पकड़ने या मारने के आदेश दिए जाएं।
इस घटना ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में वन्यजीवों के आतंक और उससे निपटने में नाकाम साबित हो रहे प्रशासनिक तंत्र की पोल खोल कर रख दी है।
