All India tv news। देहरादून: उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहालों के लिए शुरुआती शिक्षा को अब और भी रोचक और मजेदार बनाने की दिशा में धामी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी 11,580 प्राथमिक विद्यालयों में बालवाटिका (प्री-प्राइमरी) शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है।
वर्तमान में राज्य के 5,585 प्राथमिक विद्यालयों में बालवाटिका सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं, और अब शेष स्कूलों में भी इसे पूरी तरह लागू करने के लिए शिक्षा विभाग मैपिंग का काम कर रहा है।
क्यों खास होगी बालवाटिका?
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत शुरू की जा रही इन बालवाटिकाओं का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पारंपरिक रटने वाली पढ़ाई से दूर रखना है। इसके तहत 3 से 8 वर्ष की आयु के बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जाएगा।
- खेल-खेल में होगी पढ़ाई: बच्चों को किताबों के बोझ से मुक्त कर खेलकूद के माध्यम से बुनियादी ज्ञान दिया जाएगा।
- गतिविधियों के जरिए सीखने का मौका: अनुभवात्मक शिक्षा (Experiential Learning) पर विशेष ध्यान रहेगा।
- रचनात्मकता को बढ़ावा: आर्ट, क्राफ्ट और कविताओं के जरिए बच्चों की जिज्ञासा और क्रिएटिविटी को उभारा जाएगा।
- शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण: राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा अब तक करीब 200 से अधिक शिक्षकों को इसके लिए विशेष ट्रेनिंग दी जा चुकी है, ताकि वे स्थानीय और कम लागत वाली सामग्रियों से बच्चों को पढ़ा सकें।
स्कूल आना अब नहीं लगेगा बोझ :-
शिक्षा विभाग का मानना है कि बच्चे देखकर, छूकर, खेलकर और सवाल पूछकर ज्यादा बेहतर तरीके से सीखते हैं। बालवाटिका के इस नए मॉडल से सरकारी स्कूलों के प्रति बच्चों और अभिभावकों का आकर्षण बढ़ेगा और प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर ही गांव-गांव के बच्चों को भी आधुनिक और मनोरंजक प्री-प्राइमरी शिक्षा मिल सकेगी।

