All India tv news। एक तरफ सरकार हर घर आयुर्वेद का नारा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही है। पहाड़ में आयुर्वेदिक अस्पताल खुद ही बीमार पड़े हैं, क्योंकि वहां डॉक्टर ही नहीं हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अल्मोड़ा और बागेश्वर से दो बड़ी खबरें।
पहली खबर अल्मोड़ा जिले से।
प्रदेश भर में कल 23 सितंबर को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाया गया। लेकिन अल्मोड़ा जिले में आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाएं खुद बीमार नजर आ रही हैं। लंबे समय से जिले में आयुर्वेदिक चिकित्सकों का भारी टोटा बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अल्मोड़ा जिले में आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारियों के कुल 70 पद स्वीकृत हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इनमें से 20 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं।
चिकित्सकों की इस भारी कमी के कारण जिले के ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल और डिस्पेंसरी में आने वाले मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। मरीजों को मजबूरन जिला मुख्यालय या निजी क्लीनिकों की दौड़ लगानी पड़ रही है।
पदों की स्थिति देखें :-
- चिकित्साधिकारी: स्वीकृत 70, रिक्त 20
- जिला फार्मेसी अधिकारी: स्वीकृत 1, रिक्त 1
- मुख्य फार्मेसी अधिकारी: स्वीकृत 5, रिक्त 3
- फार्मेसी अधिकारी: स्वीकृत 66, रिक्त 5
जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. मोहम्मद शाहिद ने कहा है कि रिक्त पदों की सूचना निदेशालय को भेज दी गई है और उम्मीद है कि शीघ्र तैनाती होगी।
दूसरी खबर बागेश्वर जिले से।
बागेश्वर जिले में कुल 35 आयुष यूनिटों के सहारे आयुर्वेद उपचार चल रहा है। लेकिन यहां भी कहानी वही है। बागेश्वर में कुल 11 आयुर्वेदिक चिकित्सालयों को उच्चीकृत कर आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में विकसित किया गया है, जहां योग और वेलनेस की सुविधाएं भी दी जा रही हैं। इसके अलावा 7 सामान्य राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, 10 एलोपैथिक अस्पतालों में आयुष विंग, जिला अस्पताल में 2 आयुष विंग और 4 पीएमएचएस और सीएचसी में 1-1 एनएचएम आयुष सेंटर संचालित है।
लेकिन 35 यूनिटों में से 11 अस्पताल अपने निजी सरकारी भवनों में चल रहे हैं, जबकि 5 भवन किराए पर और 2 निशुल्क भवनों में संचालित हो रहे हैं।
यहां भी स्टाफ की कमी है:-
- चिकित्साधिकारी: स्वीकृत 36, रिक्त 15
- वरिष्ठ चिकित्साधिकारी: 2 स्वीकृत, 0 रिक्त
- मुख्य फार्मेसी अधिकारी: 4 स्वीकृत, 1 रिक्त
- फार्मेसी अधिकारी: 27 स्वीकृत, 2 रिक्त
जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. निष्ठा शर्मा कोहली ने बताया कि सभी आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित है और 11 अस्पतालों को आयुष्मान मंदिर के रूप में वेलनेस सेंटर बनाया गया है। चिकित्सकों के रिक्त पदों के संबंध में उच्च अधिकारियों और शासन को पत्राचार कर ब्यौरा भेजा जा चुका है।
मरीजों की सुविधा की बात करें तो जिले के 12 अस्पतालों में केवल OPD सेवा उपलब्ध है जबकि 6 अस्पतालों में मरीजों को भर्ती कर इलाज करने के लिए IPD की व्यवस्था भी मौजूद है।
सवाल यह है कि जब डॉक्टर ही नहीं होंगे तो हर घर आयुर्वेद का संकल्प कैसे पूरा होगा? सरकार को पहाड़ के इन अस्पतालों पर ध्यान देना होगा।

