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अल्मोड़ा में शिक्षा की 'जर्जर' तस्वीर: 70 सरकारी स्कूलों पर मंडराया खतरा, क्या हादसों के बाद जागेगा प्रशासन?

 


All India tv news। उत्तराखंड के पहाड़ों में नौनिहालों का भविष्य दांव पर लगा है। दांव पर सिर्फ उनका भविष्य ही नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी भी है। खबर अल्मोड़ा जिले से है, जहाँ 70 सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के भवनों को 'डी' यानी सबसे खतरनाक श्रेणी में रखा गया है। जर्जर छतें, दरकती दीवारें और खौफ के साए में पढ़ते बच्चे—आखिर जिम्मेदार अधिकारी किस बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं? देखिए हमारी यह खास ग्राउंड रिपोर्ट।

ये तस्वीरें विचलित भी करती हैं और गुस्सा भी दिलाती हैं। देश जहाँ डिजिटल इंडिया और स्मार्ट क्लासरूम की बात कर रहा है, वहीं अल्मोड़ा जिले के सरकारी स्कूलों के भवन 'डी' श्रेणी में यानी ध्वस्त होने की कगार पर पहुँच चुके हैं। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के इन 70 स्कूलों में हर पल मौत का साया मंडराता रहता है। कहीं दीवारों पर गहरी दरारें आ चुकी हैं, तो कहीं छत का पलस्तर टूटकर गिर रहा है। बरसात के मौसम में तो स्थिति और भी जानलेवा हो जाती है।
हैरानी की बात यह है कि प्रशासन और शिक्षा विभाग सब कुछ जानकर भी अनजान बना हुआ है। नौनिहालों को इन्हीं जर्जर और जोखिम भरे कमरों में बैठकर ककहरा सीखने को मजबूर होना पड़ रहा है। बरामदे से लेकर मुख्य कमरों तक, पूरा ढांचा कभी भी जमींदोज हो सकता है। अभिभावकों का कहना है कि वे हर दिन अपने बच्चों को डर-डर कर स्कूल भेजते हैं। क्या इन गरीब बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है?
सरकारी कागजों में 'डी' श्रेणी का मतलब है कि यह भवन इंसानों के रहने या बैठने लायक बिल्कुल नहीं हैं। इसके बावजूद इन भवनों में कक्षाएं संचालित होना सीधे तौर पर बच्चों की जान से खिलवाड़ है।

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