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अल्मोड़ा: ऐतिहासिक नंदा देवी मेले में बड़ा झूला हादसा, प्रशासन की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल!

 


All India tv news। उत्तराखंड के अल्मोड़ा से इस वक्त की एक बेहद बड़ी और परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। अल्मोड़ा के ऐतिहासिक और आस्था के केंद्र नंदा देवी मेले में बुधवार रात एक भयानक झूला हादसा हो गया। मेले की चकाचौंध और खुशियों के बीच अचानक चीख-पुकार मच गई, जब चलते हुए झूले का एक हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर गया। 


सोशल मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार इस दर्दनाक हादसे में एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई है। घटना के बाद पूरे मेला परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से घायल महिला को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
लेकिन इस हादसे ने अब सीधे तौर पर मेले की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है!
यह घटना गवाह हैं उस लापरवाही की, जो किसी की जान पर भी भारी पड़ सकती थी। अल्मोड़ा का ऐतिहासिक नंदा देवी मेला, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मां नंदा-सुनंदा के दर्शन और मेले का आनंद लेने पहुंचते हैं। बुधवार की रात भी यहां भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। लोग झूलों का लुत्फ उठा रहे थे, तभी अचानक एक बड़े झूले का हिस्सा टूट गया। 
झूला टूटते ही वहां मौजूद लोगों के होश उड़ गए और चारों तरफ भगदड़ मच गई। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई, लेकिन एक महिला गंभीर रूप से चोटिल हो गई है।
अब सवाल यह उठता है कि:-
  1. जब प्रशासन और अग्निशमन विभाग द्वारा मेले से पहले सुरक्षा दावों के बड़े-बड़े निरीक्षण किए गए थे, तो झूलों की फिटनेस को बारीकी से क्यों नहीं जांचा गया? 
  2. क्या चंद रुपयों के मुनाफे के लिए लोगों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया गया है?
  3. इतने बड़े और ऐतिहासिक मेले में संचालित हो रहे कमर्शियल झूलों का 'सेफ्टी ऑडिट' आखिर क्यों नहीं किया गया?
हादसे के बाद से ही स्थानीय जनता में प्रशासन और मेला आयोजकों के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कड़े सुरक्षा मानक तय नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में कोई बड़ा और जानलेवा हादसा भी हो सकता है। 
फिलहाल घायल महिला का इलाज जारी है, लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि सुरक्षा व्यवस्था में कहीं न कहीं एक बड़ी चूक हुई है। अब देखना यह होगा कि इस हादसे के बाद जाग रहा प्रशासन क्या झूला संचालकों पर कोई सख्त कार्रवाई करता है, या फिर हर बार की तरह मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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