All India tv news। उत्तराखंड की शांत वादियों और शिक्षा के केंद्र देहरादून से एक ऐसी चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे राज्य के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। देवभूमि में MBBS की सरकारी सीटों पर दाखिले के लिए एक ऐसा खेल खेला गया, जिसने न सिर्फ कानून की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि देश के वीर स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान को भी तार-तार कर दिया।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे (Freedom Fighters Quota) का कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए फायदा उठाकर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सीटें हथियाने का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। इस मामले में 4 छात्राओं समेत 5 महिलाओं के खिलाफ देहरादून के दो अलग-अलग थानों (रायपुर और क्लेमेंट टाउन) में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार ये पूरा मामला उस कोटे से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य उन वीर परिवारों को सम्मान और अवसर देना था जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। लेकिन देहरादून में इसी कोटे में सेंधमारी कर दी गई।
राजस्व विभाग की जांच और उप जिलाधिकारी अपूर्वा सिंह के आदेश के बाद चार संदिग्ध प्रमाण पत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जा चुके हैं। जिलाधिकारी सोनिका के निर्देश पर हुई इस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जी पते, गलत पारिवारिक विवरण और फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड किए थे। मोथरोवाला और कंडोली जैसे इलाकों के जो पते दिए गए थे, स्थानीय जांच में पता चला कि वे परिवार वहां कभी रहते ही नहीं थे!
इस मामले में उमा देवी, कुमारी खुशी, कुमारी परी, कुमारी स्वाति समेत पांच लोगों को नामजद किया गया है। पुलिस को अंदेशा है कि यह महज कुछ अभ्यर्थियों की धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि इसके पीछे दस्तावेज जाली बनाने वाला कोई एक संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है।

