All India tv news। महाकाल की नगरी उज्जैन से इस वक्त एक ऐसी हैरान कर देने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने विज्ञान और आस्था के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत शहर में सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इस दौरान प्रशासन ने करीब 170 साल पुराने प्राचीन 'खड़े हनुमान जी' के मंदिर के ढांचे को तो हटा दिया, लेकिन जब गर्भगृह से 8 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा को स्थानांतरित करने की बारी आई, तो जो हुआ उसने सबको हैरत में डाल दिया है।
- प्रशासन की तकनीक हुई फेल: उज्जैन नगर निगम और भारी इंजीनियरिंग टीमों ने हनुमान जी की इस भारी प्रतिमा को सुरक्षित दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए लगातार 48 घंटे तक कई प्रयास किए। बड़ी-बड़ी जेसीबी और भारी क्रेनें बुलाई गईं, लेकिन तमाम कोशिशों और आधुनिक मशीनों की ताकत के बावजूद बजरंगबली की यह मूर्ति अपनी जगह से 1 इंच भी नहीं हिली।
- आस्था या चमत्कार? इस घटना के बाद से ही स्थानीय श्रद्धालुओं और साधु-संतों में भारी उत्साह है। भक्तों का कहना है कि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि साक्षात प्रभु का चमत्कार है; 'बजरंगबली खुद यहां से नहीं जाना चाहते'। इस अनोखे वाकये को देखने के लिए वहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है, हिंदू संगठनों ने मौके पर महाआरती शुरू कर दी है, और मंदिर के आसपास बंदरों (वानर सेना) का जमावड़ा भी लग गया है जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
- बैकफुट पर प्रशासन, अब होगी स्कैनिंग: लगातार चार से ज्यादा कोशिशें नाकाम होने के बाद, प्रशासन ने फिलहाल भारी मशीनों का इस्तेमाल पूरी तरह रोक दिया है। मूर्ति को कोई नुकसान न पहुंचे, इसलिए अब पुरातत्वविदों और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रतिमा जमीन में कितनी गहराई तक धंसी है, यह जानने के लिए अब वैज्ञानिक स्कैनिंग और तकनीकी जांच का सहारा लिया जाएगा।
सड़क चौड़ीकरण की इस कार्रवाई को लेकर इलाके में तनाव और आस्था का माहौल एक साथ देखा जा रहा है। जहां एक तरफ प्रशासन सिंहस्थ के विकास कार्यों को आगे बढ़ाना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ हनुमान जी के इस 'अडिग' रूप ने विशेषज्ञों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। अब देखना यह होगा कि तकनीकी स्कैनिंग के बाद प्रशासन का अगला कदम क्या होता है।

